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Kavita Kosh से
बाजरे री रोटी गंवार की फल्डी
मिल जाये तो बात है घणी वह ही भली
म्हारो छपप्नीयो छप्पन्हियो काल्ड
फेरो अज भोल्डी दुनियाँ में.