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10:48, 27 फ़रवरी 2010 {{KKGlobal}}
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|रचनाकार=सेनापति
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[[Category:पद]]
<poem>
नवल किसोरी भोरी केसर ते गोरी, छैल-
होरी में रही है मद जोबन के छकि कै ।
चंपे कैसौ ओज, अति उन्नत उरोज पीन,
जाके बोझ खीन कटि जाति है लचकि कै ॥
लाल है चलायौ, ललचाइ ललना कों देखि,
उघरारौ उर, उरबसी ओर तकि कै ।
’सेनापति’ सोभा कौ समूह कैसे कह्यौ जात,
रह्यौ हौ गुलाल अनुराग सों झलकि कै ॥
</poem>