Changes

|संग्रह=
}}[[Category:गज़ल]]
<poem>आओ कि कोई ख़्वाब बुनें कल के वास्तेवरना ये रात आज के संगीन <ref>कठिन</ref> दौर <ref>समय</ref> की
डस लेगी जान-ओ-दिल को कुछ ऐसे कि जान-ओ-दिल
ता-उम्र <ref>सारी उम्र</ref> फिर न कोई हसीं ख़्वाब बुन सकें [संगीन दौर = कठिन समय][ता-उम्र = सारी उम्र]
गो हम से भागती रही ये तेज़-गाम <ref>तेज़ चलने वाली</ref> उम्र
ख़्वाबों के आसरे पे कटी है तमाम उम्र
 
[तेज़-गाम = तेज़ चलने वाली]
ज़ुल्फ़ों के ख़्वाब, होंठों के ख़्वाब, और बदन के ख़्वाब
मेराज-ए-फ़न <ref>कला की उँचाई तक पहुँचना</ref> के ख़्वाब, कमाल-ए-सुख़न <ref>बेहतरीन कविता</ref> के ख़्वाब
[मेराज-ए-फ़न = कला की उँचाई तक पहुँचना; कमाल-ए-सुख़न = बेहतरीन कविता] तहज़ीब-ए-ज़िन्दगी <ref>जीने की कला</ref> के, फ़रोग़-ए-वतन <ref>देश का विकास</ref> के ख़्वाबज़िन्दाँ <ref>जीवन</ref> के ख़्वाब, कूचा-ए-दार-ओ-रसन के ख़्वाब [तहज़ीब-ए-ज़िन्दगी = जीने की कला; फ़रोग़-ए-वतन = देश का विकास][ज़िन्दाँ = जीवन; कूचा-ए-दार-ओ-रसन = <ref>फ़ाँसी तक जाने वाला रस्ता]</ref> के ख़्वाब
ये ख़्वाब ही तो अपनी जवानी के पास थे
ये ख़्वाब ही तो अपने अमल <ref>साकार करना</ref> के असास <ref>नींव</ref> थेये ख़्वाब मर गये हैं तो बे-रंग है हयात<ref>जीवन</ref>यूँ है कि जैसे दस्त-ए-तह-ए-सन्ग है हयात [अमल = साकार करना; असास = नींव; हयात = जीवन][दस्त-ए-तह-ए-सन्ग = <ref>पत्थर के नीचे हाथ दब जाना (मजबूरी)]</ref> है हयात
आओ कि कोई ख़्वाब बुनें कल के वास्ते
डस लेगी जान-ओ-दिल को कुछ ऐसे कि जान-ओ-दिल
ता-उम्र फिर न कोई हसीं ख़्वाब बुन सकें
 
</poem>
{{KKMeaning}}
Delete, Mover, Uploader
894
edits