गृह
बेतरतीब
ध्यानसूची
सेटिंग्स
लॉग इन करें
कविता कोश के बारे में
अस्वीकरण
Changes
अरण्यानी / त्रिलोचन
280 bytes added
,
14:51, 12 जुलाई 2010
देखो, जितने तुम्हारे पास तारे हैं
मेरे पास फूल हैं
मेरे इन
फूलों की भाषा सुवास है
उन का कोलाहल सुगंधित है
वन्यमृग मेरे पास आते हैं
दीर्घ साँस लेते हैं
और
खड़े रहते हैं
</poem>
अनिल जनविजय
Delete, Mover, Protect, Reupload, Uploader
54,035
edits