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वो देखने में बेवफ़ा लगता तो नहीं है / सूफ़ी सुरेन्द्र चतुर्वेदी

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वो देखने में बेवफ़ा लगता तो नहीं है ।
चेहरे पे उसके देखिए चेहरा तो नहीं है ।

दरिया किनारे रेत पे उसने लिखा है कुछ,
मैं सोचता हूँ नाम वो मेरा तो नहीं है ।

वो फिर किसी के प्यार में डूबा है इन दिनों,
ये फिर किसी ग़रीब का सपना तो नहीं है ।

ढूँढू उसे तो चैन-सा मिलता है रूह को,
वरना वो मेरे शहर में रहता तो नहीं है ।

रक्खा मुझे सहेज कर जिसने तमाम उम्र,
कहने को उससे यूँ मेरा रिश्ता तो नहीं है ।