भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

शिकार / वाज़दा ख़ान

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

विषादयुक्त चेहरे
चेहरों पर चढ़े मुखौटे
टँगे हैं जैसे खूँटी पर

एक दो तीन चार...
गिनती में शायद वे दस हैं

तलाशते हुए कोई शिकार ।