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सत्ता के लोभ ने उसे पागल बना दिया / डी. एम. मिश्र
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सत्ता के लोभ ने उसे पागल बना दिया
नज़रों से फिर अवाम ने उसको गिरा दिया
औकात क्या उस सूट की धोती के सामने
गांधी को फ़कीरी ने फ़रिश्ता बना दिया
डंका हमारे मुल्क का बजता था विश्व में
कमज़र्फ़ हुकूमत ने क्या से क्या बना दिया
मौका जो मिला तुझको कहाँ मिलता वो सबको
अफ़सोस मगर तूने व्यर्थ ही गवाँ दिया
मंदिर में गया था सुकूं तलाशने मगर
उसने तो इबादत को भी धंधा बना दिया
क्या अंधभक्ति का उसे ईनाम यूँ मिला
अच्छे भले इंसान को चमचा बना दिया
लगता है आप अब मुझे पहचानते नहीं
मेरी वफ़ा का आपने अच्छा सिला दिया