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सोहैं साँवरे पथिक, पाछे ललना लोनी/ तुलसीदास

(22)

सोहैं साँवरे पथिक, पाछे ललना लोनी |

दामिनि-बरन गोरी, लखि सखि तृन तोरी,

बीती हैं बय किसोरी, जोबन होनी ||

नीके कै निकाई देखि, जनम सफल लेखि
,
हम-सी भूरि-भागिनि नभ न छोनी |

तुलसी-स्वामी-स्वामिनि जोहे मोही हैं भामिनि,

सोभा-सुधा पिए करि अँखिया दोनी ||