(राग शिवरञ्जनी-ताल कहरवा)
हिमगिरिमें हिमसे आच्छादित हिमाकार शंकर अविकार।
अमल धवल निज रूप समाहित त्रिगुणातीत विविध आकार॥
जटाजूट युत, भुजन्ग-भूषित, सिरसे बहती सुरसरि धार।
शायित लुक्कयित हिममें हर कर वर हिमातिथ्य स्वीकार॥
(राग शिवरञ्जनी-ताल कहरवा)
हिमगिरिमें हिमसे आच्छादित हिमाकार शंकर अविकार।
अमल धवल निज रूप समाहित त्रिगुणातीत विविध आकार॥
जटाजूट युत, भुजन्ग-भूषित, सिरसे बहती सुरसरि धार।
शायित लुक्कयित हिममें हर कर वर हिमातिथ्य स्वीकार॥