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"लूटा है मुझे उस की हर अदा ने / 'वहशत' रज़ा अली कलकत्वी" के अवतरणों में अंतर
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15:16, 19 अगस्त 2013 के समय का अवतरण
लूटा है मुझे उस की हर अदा ने
अंदाज़ ने नाज़ ने हया ने
दोनों ने किया है मुझ को रूसवा
कुछ दर्द ने और कुछ दवा ने
बे-जा है तेरी जफ़ा का शिकवा
मारा मुझ को मेरी वफ़ा ने
पोशीदा नहीं तुम्हारी चालें
कुछ मुझ से कहा है नक़्श-ए-पा ने
क्यूँ जौर-कशान-ए-आसमाँ से
मुँह फेर लिया तेरी जफ़ा ने
दिल को मायूस कर दिया है
बे-गाना मिज़ाज-आश्ना ने
दोनों ने बढ़ाई रौनक़-ए-हुस्न
शोख़ी ने कभी कभी हया ने
ख़ुश पाते हैं मुझ को दोस्त ‘वहशत’
दिल का अहवाल कौन जाने