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"'साँझ हो गई' / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’" के अवतरणों में अंतर

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*[[अक्षय प्रेम-जल  / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[आया हूँ मैं द्वार तुम्हारे  / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[चलते-चलते हार गया  / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[जड़ दूँ एक चुम्बन / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[तेरी वो रुलाई  / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[तेरे अधरों के सुर  / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[मेपल से भी कभी पूछना  / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[मेरे आगे हार गई थी / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[साँझ हो गई  / रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’]]
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*[[गठरी अपनी छूट गई  / रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु']]
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*[[मत रहो चुप  / रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु']]

07:43, 23 अगस्त 2023 के समय का अवतरण

साँझ हो गई
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रचनाकार रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
प्रकाशक अयन प्रकाशन, जे-19/39, राजापुरी, उत्तम नगर, नई दिल्ली-110059
वर्ष 2022
भाषा हिन्दी
विषय कविताएँ
विधा काव्य
पृष्ठ पृष्ठ:120
ISBN 978-93-94221-33-8
विविध मूल्य: 300 रुपये
इस पन्ने पर दी गई रचनाओं को विश्व भर के स्वयंसेवी योगदानकर्ताओं ने भिन्न-भिन्न स्रोतों का प्रयोग कर कविता कोश में संकलित किया है। ऊपर दी गई प्रकाशक संबंधी जानकारी छपी हुई पुस्तक खरीदने हेतु आपकी सहायता के लिये दी गई है।