भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
"सीख / चन्द्रप्रकाश जगप्रिय" के अवतरणों में अंतर
Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=चन्द्रप्रकाश जगप्रिय |अनुवादक= |स...' के साथ नया पृष्ठ बनाया) |
(कोई अंतर नहीं)
|
03:50, 9 जून 2016 के समय का अवतरण
पढ़ रे नुनुआ आ ई ऊ
झाल लगो तेॅ करियें सू।
लागै चैत नगीचे छै
मालपुओॅ के ही खुशबू!
कन्हौं आग दिखावै नै
धुआँ उठै छै धू-धू-धू।
बिन मूँ धोलैं खैलैं तोंय
ई आदत पर थू-थू-थू।
घर से बाहर नै जइयें
वहाँ चलै छै की रं लू।