Last modified on 24 सितम्बर 2012, at 22:51

दरिया /गुलज़ार

Sharda suman (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 22:51, 24 सितम्बर 2012 का अवतरण (' {{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=गुलज़ार |संग्रह=रात पश्मीने की / ग...' के साथ नया पन्ना बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)

इतनी सी उम्मीद लिये--
शायद फिर से देख सके वह, इक दिन उस
लड़की का चेहरा,
जिसने फूल और तुलसी उसको पूज के अपना
                     वर माँगा था--

उस लड़की की सूरत उसने,
अक्स उतारा था जब से, तह में रख ली थी!!