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भाव-ताव / रूपसिंह राजपुरी

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सब्जी मण्डी मैं,
ईयां ई बूझ बैठयो,
टमाटरां रो मोल,
सेठ बोल्यो - ताजा, बढिया पांच रीपिया,
सड़या, गळया अर बासी,
दस रीपिया किलो गा तोल।
मैं कैयो - अै सड़या टमाटर,
कठै जावैंगा?
बो बोल्यो,
आज म्हारै शहर मैं,
कवि सम्मेलन है,
अै बठै काम आवैंगा।