भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मुझको अपनी बात इशारों में कहने दो / प्रमोद तिवारी

Kavita Kosh से
Lalit Kumar (चर्चा | योगदान) द्वारा परिवर्तित 12:45, 23 जनवरी 2017 का अवतरण ('{{KKGlobal}} {{KKRachna |रचनाकार=प्रमोद तिवारी |अनुवादक= |संग्रह=म...' के साथ नया पृष्ठ बनाया)

(अंतर) ← पुराना अवतरण | वर्तमान अवतरण (अंतर) | नया अवतरण → (अंतर)
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बहुत साफ बोलूंगा तो
सारा जग धुंधला हो जाएगा
बेहतर होगा
मुझको अपनी बात
इशारों में कहने दो

एक बार सूरज को
सूरज क्या लिख दिया
गीत में मैंने
सारी उम्र अंधेरे ने
धमकाया
मुझे रोशनी लिख दो
एक बार पूनम का
चांद छू गया
मन की शीतलता को
सारी उम्र
धूप ने तड़पाया
कि मुझे
चांदनी लिख दो
अंधियारे को
लिखा रोशनी
और धूप को
कहा चांदनी
मनमानी करने वाले पर
खूब हुई
जमकर मनमानी
कभी अकेले में मिलना तो
मजबूरी भी बतला दूंगा
लेकिन बेहतर होगा ये
ये हालात
इशारों में कहने दो