भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

"रहे न चाँद, यही चाँदनी रहे न रहे / गुलाब खंडेलवाल" के अवतरणों में अंतर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
पंक्ति 26: पंक्ति 26:
  
 
गुलाब! आपकी ख़ुशबू तो उनके साथ रही  
 
गुलाब! आपकी ख़ुशबू तो उनके साथ रही  
अब इसका सोच नहीं पंखड़ी रहे न रहे  
+
अब इसका सोच नहीं, पंखड़ी रहे न रहे  
 
<poem>
 
<poem>

02:32, 7 जुलाई 2011 का अवतरण


रहे न चाँद, यही चाँदनी रहे न रहे
उभर रही है जो रंगत नयी, रहे न रहे

दिलों की कल यही आवारगी रहे न रहे
हसीन शाम की ऐसी घड़ी रहे न रहे

हमारे प्यार की यह ताज़गी न कम होगी
किसीके रूप की जादूगरी रहे न रहे

जो आ सको तो अभी आके एक नज़र देखो
नहीं तो कल कहीं बीमार भी रहे न रहे

किसीकी याद कसकती रहेगी दिल में सदा
ये चार दिन की भले ज़िन्दगी रहे न रहे

अभी तो कहते हैं, 'दे देंगे जान,' पर देखें
पहुँच गये तो वहाँ जान ही रहे न रहे

गुलाब! आपकी ख़ुशबू तो उनके साथ रही
अब इसका सोच नहीं, पंखड़ी रहे न रहे