ग़ज़लें
- चलो कि हम भी ज़माने के साथ चलते हैं / सदा अम्बालवी
- तबीअत रफ़्ता रफ़्ता ख़ूगर-ए-ग़म होती जाती है / सदा अम्बालवी
- दिखाएगी असर दिल की पुकार आहिस्ता आहिस्ता / सदा अम्बालवी
- दिल के कहने पर चल निकला / सदा अम्बालवी
- न ज़िक्र गुल का कहीं है न माहताब का है / सदा अम्बालवी
- लाख तक़दीर पे रोए कोई रोने वाला / सदा अम्बालवी