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कैफ़ी आज़मी
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कैफ़ी आज़मी
जन्म | 14 जनवरी 1919 |
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निधन | 10 मई 2002 |
उपनाम | |
जन्म स्थान | ग्राम मिज़वाँ, आज़मगढ़, उत्तर प्रदेश, भारत |
कुछ प्रमुख कृतियाँ | |
आख़िरे-शब, झंकार, आवारा सज़दे | |
विविध | |
कैफ़ी आज़मी का मूल नाम अख़्तर हुसैन रिज़्वी था। आपको राष्ट्रीय पुरस्कार और फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार मिले हैं। | |
जीवन परिचय | |
कैफ़ी आज़मी / परिचय |
संग्रह
ग़ज़लें एवं नज्में
- अंदेशे / कैफ़ी आज़मी
- अन्देशे / कैफ़ी आज़मी
- अब तुम आग़ोश-ए-तसव्वुर / कैफ़ी आज़मी
- अज़ा में बहते थे आँसू यहाँ / कैफ़ी आज़मी
- आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है / कैफ़ी आज़मी
- आज सोचा तो आँसू भर आए / कैफ़ी आज़मी
- आवारा सजदे / कैफ़ी आज़मी
- इब्ने-मरियम / कैफ़ी आज़मी
- इतना तो ज़िन्दगी में किसी की ख़लल पड़े / कैफ़ी आज़मी
- एक दुआ / कैफ़ी आज़मी
- एक बोसा / कैफ़ी आज़मी
- ऐ सबा! लौट के किस शहर से तू आती है? / कैफ़ी आज़मी
- औरत / कैफ़ी आज़मी
- कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतशार-सा है / कैफ़ी आज़मी
- कभी जमूद कभी सिर्फ़ इंतिशार सा है / कैफ़ी आज़मी
- कर चले हम फ़िदा / कैफ़ी आज़मी
- कशमकश / कैफ़ी आज़मी
- काफ़िला तो चले / कैफ़ी आज़मी
- कोई ये कैसे बता ये कि वो तन्हा क्यों हैं / कैफ़ी आज़मी
- खारो-ख़स तो उठें, रास्ता तो चले / कैफ़ी आज़मी
- खार-ओ-खस तो उठें, रास्ता तो चले / कैफ़ी आज़मी
- चरागाँ / कैफ़ी आज़मी
- तुम / कैफ़ी आज़मी
- तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो / कैफ़ी आज़मी
- तुम परेशां न हो / कैफ़ी आज़मी
- दस्तूर क्या ये शहरे-सितमगर के हो गए / कैफ़ी आज़मी
- दायरा / कैफ़ी आज़मी
- दो-पहर / कैफ़ी आज़मी
- दोशीज़ा मालिन / कैफ़ी आज़मी
- धमाका / कैफ़ी आज़मी
- नज़राना / कैफ़ी आज़मी
- झुकी झुकी सी नज़र बेक़रार है कि नहीं / कैफ़ी आज़मी
- मकान / कैफ़ी आज़मी
- मशवरे / कैफ़ी आज़मी
- मास्को / कैफ़ी आज़मी
- मेरे दिल में तू ही तू है / कैफ़ी आज़मी
- मैं ढूँढता हूँ जिसे वो जहाँ नहीं मिलता / कैफ़ी आज़मी
- मैं यह सोचकर उसके दर से उठा था / कैफ़ी आज़मी
- मैं ढूँढ़ता हूँ जिसे वह जहाँ नहीं मिलता / कैफ़ी आज़मी
- पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाए / कैफ़ी आज़मी
- पशेमानी / कैफ़ी आज़मी
- पहला सलाम / कैफ़ी आज़मी
- पत्थर के ख़ुदा वहाँ भी पाये / कैफ़ी आज़मी
- पीरे-तस्मा-पा / कैफ़ी आज़मी
- बस इक झिझक है यही / कैफ़ी आज़मी
- लश्कर के ज़ुल्म / कैफ़ी आज़मी
- लाई फिर इक लग़्ज़िशे-मस्ताना तेरे शहर में / कैफ़ी आज़मी
- लेनिन / कैफ़ी आज़मी
- वक्त ने किया क्या हंसी सितम / कैफ़ी आज़मी
- वतन के लिये / कैफ़ी आज़मी
- वो कभी धूप कभी छाँव लगे / कैफ़ी आज़मी
- वो भी सराहने लगे अरबाबे-फ़न के बाद / कैफ़ी आज़मी
- सदियाँ गुजर गयीं / कैफ़ी आज़मी
- सुना करो मेरी जाँ / कैफ़ी आज़मी
- सोमनाथ / कैफ़ी आज़मी
- शोर यूँ ही न परिंदों ने मचाया होगा / कैफ़ी आज़मी
- शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा / कैफ़ी आज़मी
- हाथ आकर लगा गया कोई / कैफ़ी आज़मी