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अशोक अंजुम की ग़जलें / अशोक अंजुम
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अशोक अंजुम की ग़जलें
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रचनाकार | अशोक अंजुम |
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इस पन्ने पर दी गई रचनाओं को विश्व भर के स्वयंसेवी योगदानकर्ताओं ने भिन्न-भिन्न स्रोतों का प्रयोग कर कविता कोश में संकलित किया है। ऊपर दी गई प्रकाशक संबंधी जानकारी छपी हुई पुस्तक खरीदने हेतु आपकी सहायता के लिये दी गई है।
इस पुस्तक में संकलित रचनाएँ
- हवा-पानी की साज़िश से रही यूँ बेख़बर मिट्टी / अशोक अंजुम
- निकली है आज छूने लो आसमान चिड़िया / अशोक अंजुम
- खाना- पीना, हंसी-ठिठोली , सारा कारोबार अलग / अशोक अंजुम
- झिलमिल-झिलमिल जादू-टोना पारा-पारा आँख में है / अशोक अंजुम
- ये बच्चा क्या ही बच्चा है ख़ुदा का नूर पाया है / अशोक अंजुम
- सहरा, जंगल, पर्वत, पानी / अशोक अंजुम
- अब के आफत ऐसी बरसी दीवारो।दर टूट गए / अशोक अंजुम
- बरसना था नहीं बरसे जो फिर बरसे तो क्या बरसे / अशोक अंजुम
- वो मिले यूँ कि फिर जुदा ही न हो / अशोक अंजुम
- माँ के आँसू छलक पड़े क्यों आख़िर मुसकानों के बीच / अशोक अंजुम
- बस आखिरी यही तो इक रस्ता है, बात कर / अशोक अंजुम
- बात बिगड़ी, ऐसी बिगड़ी कि बनाते न बनी / अशोक अंजुम
- सब जाने-पहचाने हैं / अशोक अंजुम
- वफाएँ लड़खड़ाती हैं भरोसा टूट जाता है / अशोक अंजुम
- प्यार है, इज़हार है बाज़ार में / अशोक अंजुम
- फिर चेहरे पर चेहरा निकला / अशोक अंजुम
- दिन भी कमरे में रात कमरे में / अशोक अंजुम
- वे मुझसे ये कहते हैं / अशोक अंजुम
- कदम जब डगमगाए रोशनी में / अशोक अंजुम