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"घर-आँगन (रुबाइयाँ) / जाँ निसार अख़्तर" के अवतरणों में अंतर

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* [[अब तक वही बचने की सिमटने की अदा / जाँ निसार अख़्तर]]
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* [[दरवाजे की खोलने उठी है ज़ंजीर / जाँ निसार अख़्तर]]
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* [[क्यों हाथ जला, लाख छुपाए गोरी / जाँ निसार अख़्तर]]
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* [[चुप रह के हर इक घर की परेशानी को / जाँ निसार अख़्तर]]
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* [[जज़्बों की गिरह खोल रही हो जैसे / जाँ निसार अख़्तर]]

20:11, 19 अक्टूबर 2009 के समय का अवतरण

घर-आँगन (रुबाइयाँ)
Ek Jawaan Maut.jpg
रचनाकार जाँ निसार अख़्तर
प्रकाशक वाणी प्रकाशन
वर्ष 1999
भाषा हिन्दी
विषय
विधा
पृष्ठ 118
ISBN
विविध निदा फ़ाज़ली द्वारा संपादित
इस पन्ने पर दी गई रचनाओं को विश्व भर के स्वयंसेवी योगदानकर्ताओं ने भिन्न-भिन्न स्रोतों का प्रयोग कर कविता कोश में संकलित किया है। ऊपर दी गई प्रकाशक संबंधी जानकारी छपी हुई पुस्तक खरीदने हेतु आपकी सहायता के लिये दी गई है।