भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

अंधेरे में देखना / प्रताप सहगल

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अंधेरे में देखना
Andhere-mein-dekhna-pratap-sehgal.jpg
रचनाकार प्रताप सहगल
प्रकाशक अभिरुचि प्रकाशन, विश्वासनगर, शाहदरा, दिल्ली-110032
वर्ष 1994
भाषा हिन्दी
विषय
विधा
पृष्ठ 94
ISBN
विविध कवि का चौथा कविता संग्रह
इस पन्ने पर दी गई रचनाओं को विश्व भर के स्वयंसेवी योगदानकर्ताओं ने भिन्न-भिन्न स्रोतों का प्रयोग कर कविता कोश में संकलित किया है। ऊपर दी गई प्रकाशक संबंधी जानकारी छपी हुई पुस्तक खरीदने हेतु आपकी सहायता के लिये दी गई है।

नये सिरे से

सुनो अखबार !

अंधेरा और आदमी

बूचड़खाना

प्रतिच्छाया