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* [[बस चंद ही दिनों के थे डेरे चले गए / राजेंद्र नाथ 'रहबर']]   
 
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* [[जो शख़्स  भी तहज़ीबे-कुहन छोड़ रहा है / राजेंद्र नाथ 'रहबर']]  
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* [[जो शख्स़ भी तहज़ीबे-कुहन छोड़ रहा है / राजेंद्र नाथ 'रहबर']]  
 
* [[नसीमे-सुब्ह का झोंका इधर नहीं आया / राजेंद्र नाथ 'रहबर']]  
 
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* [[फ़र्क़ है तुझ में, मुझ में बस इतना / राजेंद्र नाथ 'रहबर']]  
 
* [[फ़र्क़ है तुझ में, मुझ में बस इतना / राजेंद्र नाथ 'रहबर']]  

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तेरे ख़ुशबू में बसे ख़त
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रचनाकार राजेंद्र नाथ 'रहबर'
प्रकाशक कल्पांत प्रकाशन दिल्ली 110032
वर्ष 2017
भाषा हिन्दी
विषय शायरी
विधा ग़ज़ल
पृष्ठ 168
ISBN 81-903889-8-3
विविध
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